माँ की हिम्मत

एक गांव में शालिनी नाम की एक औरत रहती थी। उसके एक बेटा था, जिसका नाम रामू था। रामू एक छोटे से ऑफिस में काम करता था। इस काम से उसकी माँ शालनी बहुत खुश थी। एक दिन सुबह उसकी माँ अपने बेटे से बोली, कि बेटा नाश्ता कर लो ऑफिस जाने का समय हो रहा है। बेटा बोला हां माँ मैं नाश्ता कर लूगा। माँ गुस्से में बोली तुम अपना समय बर्बाद कर रहे हो तुम बिना नाश्ता किए हुए ऑफिस चले जाओगे।

रामू जबाब दिया,कि मेरी प्यारी माँ मैं आपके हाथ का नाश्ता में कैसे मिस कर सकता हूँ। आपके हाथों में तो जादू है। आप जो भी बनाती हो सब खाने वाले अंगुलियां चाटते रह जाते हैं। एक बार आपने हमारे टिफिन बॉक्स में पनीर की सब्जी और पूड़ी दिया था, तो मेरे सारे ऑफिस वाले आपकी पनीर की सब्जी और पूड़ी के दीवाने हो गये थे।  सभी लोग आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे, यहां तक कि मेरा दोस्त सोनू भी कह रहा था, कि आपके हाथ से एक पनीर की सब्जी की सब्जी और पूड़ी की एक दुकान खोल दूं।

तब रामू की माँ बोली अच्छा बेटा बहुत हो गई मेरी तारीफ अब चल कर नाश्ता कर लो, बहुत देर हो रही है। रामू नाश्ता करने के लिए के बाद ऑफिस के लिए चला जाता है। इसी तरह रामू और उसकी माँ शालनी के दिन गुजरते रहते हैं।

अचानक रामू के ऑफिस में सार्ट सर्किट होने की वजह से रामू का ऑफिस बंद हो जाता है। रामू परेशान होकर घर पहुंचता है। रामू को परेशान देखकर उसकी माँ बोली क्या बात है, बेटा क्यों इतने परेशान हो? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है? तभी रामू बोलता है, नही माँ ऐसी कोई बात नही है।  मेरे ऑफिस में सार्ट सर्किट होने की वजह से मेरा ऑफिस बन्द हो गया। मेरी नौकरी छूट गई है।

अब मैं दूसरी नौकरी की तलाश में हूँ। उसकी माँ बोली ठीक है, बेटा तुम परेशान न हो तुमको कोई जल्दी ही नौकरी मिल जाएगी। एक महीना गुजर जाता है, पर रामू को कोई भी नौकरी नहीं मिलती है। घर में भी दिक्कत आने लगती है। एक दिन रामू अपनी माँ से बोला माँ अब हम क्या करें, एक महीना हो गया कहीं भी नहीं मिली। तब रामू की माँ बोली देखो, बेटा भगवान पर भरोसा रखो सब ठीक हो जाएगा, तुम्हें नौकरी नहीं मिली तो क्या हुआ। हम और तुम मिलकर अपना खुद का व्यापार कर सकते हैं। तभी रामू खुशी से माँ से पूछता है, क्या माँ अपना खुद का व्यापार।

तब रामू की माँ बोली हाँ बेटा, अपना खुद का व्यापार, तुम्हें तो कहते हो कि मैं पनीर की सब्जी और पूडी बहुत अच्छी बनाती हूँ।  तो मैं पनीर की सब्जी और पूडी बनाऊंगी तुम उसे बेच देना। भगवान की कृपा रही तो पनीर की सब्जी और पूडी का व्यापार बहुत अच्छा चल जाएगा। रामू बोला पर माँ हमारा खुद का व्यापार करने के लिए हमारे पास पैसे भी तो नहीं हैं। रामू की माँ बोली ऐ लो मेरे  सोने के कंगन इन्हें बेंच आना। हम अपना व्यापार शुरू करेगें। अगर भगवान की मर्जी होगी तो हम फिर से कंगन खरीद लूंगी। रामू एक सुनार की दुकान पर जाकर कंगन को बेच देता है। मां को पैसे लाकर देता है।

तब उसकी माँ बेटे से कहती है, कि बेटा ऐ लो पैसे, जाकर पनीर की सब्जी और पूडी की सामग्री ले आओ। रामू जाकर पनीर की सब्जी और पूडी की सामग्री  लेकर आता है। शालनी और उसका बेटा मिलकर दोनों पनीर की सब्जी और पूडी बनाते हैं।

रामू उसे छोटे ठेले पर रखकर बेचने लगता है। रामू एक पनीर की सब्जी और पूडी की प्लेट 50 रुपये की बेचता है। ग्राहक पनीर की सब्जी और पूडी खा कर बहुत खुश हो जाते हैं। एक बार एक ग्राहक शालनी से कहता है, कि बहन आपकी बनाई  पनीर की सब्जी और पूडी बहुत स्वादिष्ट है। मैं अपने गांव में ऐसी पनीर की सब्जी और पूडी कभी भी नहीं नही खायी। शालनी उस ग्राहक से बोली धन्यवाद भाई साहब हमारे ठेले पर आते रहना और हमारी सब्जी की सब्जी और पूडी  के बारे में सब को बताते रहना। ग्राहक बोलता है, हां क्यो नही मै जरूर बताऊंगा। ग्राहक बोलता है, मुझे आप एक प्लेट और दे दीजिए।

इस तरीके से शालनी और उसके बेटे का व्यापार अच्छी तरह से चलने लगा। हमेशा उनके ठेले पर भी रहती थी। उसी गांव में एक मुरली का एक बड़ा आदमी जमीन के सिलसिले में आया था। दोपहर समय था, वो अपने सेक्रेटरी से पूछता है, कि क्या इस गांव में कोई फाइव स्टार होटल है क्या,  मुझे बहुत भूख लग रही है। तब सैक्रेटरी बोला सर ये बहुत छोटा गांव है।  यहां होटल भी नहीं है, कि आप खाना खा सको, आपको ठेले पर ही खाना खाना पड़ेगा। तभी बड़ा आदमी बोला क्या इन ठेलों पर नहीं – नहीं पता नहीं ये सारे लोग कैसा खाना बनाते होंगे साफ-सफाई भी रखते होंगे कि नहीं, मैं खाना नहीं खाऊंगा।

तभी उसके पास आकर एक आदमी मुरली से कहता है, कि साहब जी आप पनीर की सब्जी और पूडी खाइए आप सारे बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल भूल जाएंगे,  साफ सफाई के बारे में भी परेशान मत होइए और बहुत ही सफाई से खाना बनाते हैं। मुरली बोला अच्छा अगर ऐसी बात है, तो चलो मुझे बहुत तेज भूख लगी है, सभी लोग मिलकर रामू और शालनी के ठेले पर आते हैं।

साहब जी को एक प्लेट पनीर की सब्जी और पूडी दीजिए। रामू मुरली को लाकर एक प्लेट दे देता है। मुरली उसे खाकर कहता है, कि अरे कितना स्वादिष्ट खाना है। मैने कभी भी फाइव स्टार होटल में भी ऐसा खाना नहीं खाया और सेक्रेटरी तुम भी खा लो सच में बहुत अच्छा खाना है। मुझे और मेरे सेक्रेटरी को एक प्लेट और दीजिए,मुरली से कहता है, कि माँ जी आप और आपका बेटा हमारे साथ आइए।

मैं अपने शहर में एक पनीर की सब्जी और पूडी का एक होटल खोलूंगा।  मैं आपके रहने का भी इंतजाम कर दूंगा। आपको किसी बात की भी तकलीफ नहीं होगी। रामू और शालनी एक दूसरे को देखते हैं। शालनी मुरली से कहती है, कि बेटा हम अपना गांव  छोड़कर नहीं आयेगे। हम यहां पर बहुत खुश हैं, और हमें किसी भी बात की तकलीफ नहीं है, धन्यवाद जो तुमने हम पर इतना भरोसा किया मुरली रामू से पूछता है, कि भाई तुम क्या कहते हो, रामू  बोलता है कि जो मेरी माँ की बात है, वही मैं भी कहता हूं।

मैं अपनी मां के साथ बहुत ज्यादा  खुश हूँ।  मुरली बोलता है, वाह माँ जी आप तो  धन्य हो। मैं इस गांव में जमीन खरीदने आया था, लेकिन यहां आकर मैं एक अच्छे परिवार से मिलकर जा रहा हूँ। मैं यही अपनी जमीन पर एक जमीन पर एक होटल  बनवा दूँगा, और आपको उस होटल  मैं पनीर की सब्जी और पूडी बेचने आना ही होगा। रामू  तुम्हें उस होटल संभालना पड़ेगा।

एक कहकर मुरली से चला जाता है, और कुछ दिन के बाद वह अपनी खरीदी हुई जमीन पर एक होटल  बनाता है। रामू उस होटल को संभालता है, और शालिनी पनीर की सब्जी और पूडी बनाती हैं, इस प्रकार दोनों मां-बेटे खुशी-खुशी रहने लगते हैं।

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